व्यथा के कारण तुम
दुःख भी तुमने दिए
निष्ठुर!मृदुल हृदय पर
तीक्ष्ण वार तुमने किए
अनेकों पीड़ा से
सुख की नींव उठाते
तुम कौन मेरा जीवन सजाते?
इस अभाव भरे
चेतना-शून्य मन में
अंधियारे सूने
अभूत गगन में
अनंत प्रकाश सम
आते मुस्क्याते
तुम कौन मेरा जीवन सजाते?
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Rajdip Kota
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